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108 महाशक्ति यज्ञों की शृंखला

Written by Siddhashram Dhaam on .

पूर्ण साधनात्मक

१०८ महाशक्ति यज्ञों की श्रृंखला


 

आज समाज में चारों ओर कलियुग की भयावहता फैली हुई है। समस्त विश्व विनाश के कगार पर खड़ा है। ऐसे समय में अलौकिक शक्तियों के स्वामी महान् तपस्वी सिद्धाश्रम सिरमौर युग चेतना पुरुष परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने इस जीवन में माता भगवती जगत् जननी दुर्गा मां की अनेकों कठिनतम साधनाओं व महाशक्तियज्ञों को सम्पन्न करके माता भगवती को प्रत्यक्ष उपस्थित किया तथा जन-जन के कल्याण एवं कलियुगी भयावहता को नष्ट करके सतयुग की नींव डालने हेतु 108 महाशक्तियज्ञों को समाज में सम्पन्न करने का पूर्ण आशीर्वाद भगवती दुर्गा जी से प्राप्त किया है।
समस्त यज्ञों में सर्वश्रेष्ठ महाशक्तियज्ञ, जिन्हें सम्पन्न करने की पात्रता आज तक समाज में किसी ने प्राप्त ही नहीं की। इस प्रकार के साधनात्मक महाशक्तियज्ञ केवल सिद्धाश्रम (ऋषि-मुनियों की तपस्थली) में ही उच्च कोटि के ऋषियों द्वारा सम्पन्न किये जाते हैं।
महाशक्तियज्ञ के माध्यम से प्रकृति की मूल सत्ता माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा माँ की आराधना की जाती है। पहली बार इस धरती पर महाशक्तियज्ञ की नींव सिद्धाश्रम के संस्थापक-संचालक ऋषि परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने डाली है। इन महाशक्तियज्ञों के विषय में योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज से ही संक्षिप्त सी जानकारी प्राप्त हुयी है। योगीराज जी का कहना है कि पहले समाज मेरे द्वारा किये जा रहे महाशक्तियज्ञों का प्रभाव देखता चला जाये। इन यज्ञों की तरह पूर्ण प्रभावक साधनात्मक यज्ञ इससे पहले सम्पन्न होने के कहीं प्रमाण प्राप्त ही नहीं हो सकेंगे और न ही कोई इन्हें वर्तमान में सम्पन्न कर सकता है, क्योंकि समाज के बीच एक यज्ञ को सम्पन्न करना ही मौत को गले लगाने के बराबर होता है।
योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के द्वारा समाज में 108 महाशक्तियज्ञ सम्पन्न किये जाने हैं, जिनमें से इस लेख के लिखे जाने तक इस शृंखला के आठ महाशक्तियज्ञ सम्पन्न हो चुके हैं। इनमें से पांच यज्ञ तो योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने अपने आपको बहुत सामान्य सा रखते हुये सम्पन्न किये हैं। योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने इन आठ महाशक्ति यज्ञों के माध्यम से समाज के लोगों की दिशाधारा ही बदल दी है। इनसे लाखों लोग लाभान्वित हो चुके हैं। जन-जन में माँ की चेतना जाग्रत् हो रही है। आध्यात्मिक जगत् में एक नवीन हलचल सी महसूस हो रही है। जिन क्षेत्रों में ये यज्ञ सम्पन्न हुये हैं, वहां के लोग यह कहने को बाध्य हुये हैं कि आज तक ऐसा साधनात्मक यज्ञ न तो जीवन में देखा है और न सुना है।
इन 108 महाशक्तियज्ञों की शृंखला का पहला महाशक्तियज्ञ भारत देश में मध्य प्रदेश प्रांत के जिला जबलपुर में जुलाई से अगस्त 1990 में सम्पन्न हुआ था। यह पहला महाशक्तियज्ञ बहुत ही छोटी जगह में सम्पन्न किया गया। इस यज्ञ का आयोजन कमलेश गुप्ता के माध्यम से किया गया। इस पहले यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद सायंकाल के प्रवचन में योगीराज जी ने इन महाशक्तियज्ञों की विशेषता की कुछ जानकारी दी थी। महाराजश्री ने कहा था, ‘‘मैं आज इस छोटी सी जगह से जिन महाशक्तियज्ञों की शृंखला की शुरूआत कर रहा हूँ, उनकी विराट्ता क्या होगी ? यह लोगों की कल्पनाओं से बाहर की बात है। यह यज्ञ क्या हैं ? मैं क्या हूँ ? मेरी साधनात्मक क्षमता क्या है ? यह लोग आने वाले समय में ही समझ सकेंगे।’’ इस पहले ही यज्ञ में अनेकों आश्चर्यचकित करने वाली घटनायें घटीं।
इस पहले यज्ञ की नींव (म.प्र.) में डालने के बाद चार महाशक्तियज्ञ हरियाणा प्रांत में सम्पन्न किये गये। उसके बाद छठवां महाशक्तियज्ञ पुनः मध्य प्रदेश प्रांत के शहडोल संभाग के अनूपपुर जिले में दिनांक 18.10.1993 से 28.10.1993 को सम्पन्न किया गया। इस यज्ञ ने तो समाज के जनमानस में हलचल ही मचा दी, क्योंकि इसी यज्ञ में लोगों को योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने अपनी विराट्ता व विलक्षणता का अहसास कराया व अपने युग चेतना पुरुष होने के अनेकों प्रमाण दिये। अपनी साधनात्मक शक्ति का भान कराया और इसी महाशक्तियज्ञ में योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने माता आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा जी से शक्ति संन्यास दीक्षा ग्रहण करके पूर्ण संन्यास वेष को धारण किया।
इसके पूर्व महाराजश्री साधक के रूप में सादा वेश में रहते थे और सफेद धोती-कुर्ता धारण करते थे। इस यज्ञ में उनके द्वारा सैकड़ों चमत्कारिक घटनायें उपस्थित की गयीं। इसी यज्ञ में योगीराज जी ने समाज को अवगत कराया कि समाज जिस युग चेतना पुरुष को वर्तमान समय में तलाश रहा है, वह मैं ही हूँ। उन्होंने बताया कि मेरे जन्म व कार्यों के विषय में अब से हजारों वर्ष पहले तक के अनेक भविष्यवक्ताओं ने अपनी पुस्तकों में लिख रखा है, उन्हें तुम पढ़ सकते हो। छठवां महाशक्तियज्ञ सम्पन्न करने के बाद तो जैसे समाज में योगीराज जी की योगमाया का प्रभाव फैलता चला गया। इन यज्ञों की विशेषता से समाज में धूम मच गयी। आध्यात्मिक क्षेत्र में हलचल सी मच गयी और इसी शृंखला का सातवां महाशक्तियज्ञ म. प्र. प्रान्त के रीवा जिले में सम्पन्न हुआ, जिसमें अनेकों प्रांतों के लोगों ने भाग लिया। इस यज्ञ में योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने अपने प्रवचनों में लोगों को अनेक नवीन आध्यात्मिक चिन्तन प्रदान किये, अनेकों लोगों को असाध्य रोगों में लाभ दिया तथा अनेक विक्षिप्त लोगों को यज्ञ के प्रभाव से ठीक किया। समाज को एक नवीन आध्यात्मिक राह दिखायी एवं इसी यज्ञ में अनेकों लोगों को माता भगवती के दर्शन तक कराये व अनेकों चमत्कारिक घटनायें उपस्थित कीं। पूर्णाहुति के दिन उपस्थित होने वाले समस्त भक्तों को 32 दिन का जीवनदान प्रदान किया। देश-विदेश के विषय में अनेकों भविष्यवाणियां कीं। अनेक घटनाओं के माध्यम से अपनी साधनात्मक क्षमता का अहसास कराया। हजारों लोगों को आध्यात्मिक जीवन जीने की राह पर बढ़ाया।
इसी सातवें महाशक्तियज्ञ की पूर्णाहुति के बाद वहां उपस्थित माँ के भक्तों व शिष्यों के बीच आपने अनेकों साधनात्मक चिन्तन प्रदान किये। उन्होंने कहा कि आठवां महाशक्तियज्ञ उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की बिन्दकी तहसील में किया जायेगा, जो दिनांक 25 सितम्बर से 5 अक्टूबर 1995 के बीच सम्पन्न होगा। इसके आयोजक श्री रामखेलावन शुक्ल होंगे। परम पूज्य सद्गुरुदेव जी महाराज स्वयं इन यज्ञों की विशेषता व विलक्षणता पहले महाशक्तियज्ञ से ही समाज को बताते रहे हैं। साथ ही अपना साधनात्मक चेलैंज भी रखते रहे हैं। आपका कहना है कि इन महाशक्तियज्ञों को मेरे अतिरिक्त कोई भी तांत्रिक, मांत्रिक, साधक, योगी अथवा धर्माचार्य सम्पन्न नहीं कर सकता है।
इस आठवें महाशक्ति यज्ञ में एक बार पुनः आपने समाज को इन यज्ञों की क्षमता परखने के लिये साधनात्मक चेलैंज दिया। आपने कहा कि जो व्यक्ति यज्ञ में मेरे साथ चैतन्य होकर यज्ञ वेदी के पास आद्योपान्त बैठकर दिखा देगा, उसे मैं 5 लाख रुपये का इनाम दूंगा और अपना शेष जीवन उसकी अधीनता में गुजार दूंगा। ये सभी सूचनायें कई समाचार पत्रों एवं सिद्धाश्रम संदेश पत्रिका में प्रकाशित कराई र्गइं तथा पैम्फ्लेट आदि छपवाकर समाज में वितरित कराये गये। उसी वर्ष जनवरी माह में इलाहाबाद के संगम तट पर अर्धकुम्भ का मेला चल रहा था। इस मेले में सभी धर्मों केे पण्डाल लगे हुये थे तथा देश-विदेश से कई लाख भक्त आये हुये थे।
श्री गुरुदेव जी महाराज के आदेशानुसार कुछ शिष्यों के द्वारा व्यक्तिगत रूप से सभी धर्मप्रमुखों तक आठवें महाशक्तियज्ञ के विषय में सूचना भेजी गई तथा श्री गुरुदेव जी महाराज का साधनात्मक चेलैंज भी पहुंचाया गया। साथ ही उन्हें यज्ञ में आने का निमंत्रण भी दिया गया। कई धर्माचार्यों के प्रतिनिधि यज्ञस्थल तक आये और वहां की ऊर्जात्मक स्थिति देखकर वापस चले गये। किसी की हिम्मत आपके साधनात्मक चेलैन्ज को स्वीकार करने की नहीं हो पाई। यज्ञस्थल में यज्ञ समय पर थोड़ी दूर पर सभी भक्तों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। वहां पर भी अत्यन्त तीव्र साधनात्मक ऊर्जा का प्रवाह रहता था। किसी व्यक्ति के द्वारा वहां पर भी पूर्ण चैतन्य स्थिति में 1 घंटे तक बैठने की स्थिति निर्मित नहीं हो पाई। एक घंटे के अन्दर ही आलस्य और निद्रा घेर लेती थी।
इसी प्रकार की अनेकों चमत्कारिक घटनाओं को उपस्थित करके योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने आठवें महाशक्तियज्ञ की ऊर्जा का अहसास समाज को कराया तथा इस महत्त्वपूर्ण यज्ञ में लाखों लोगों ने उपस्थित होकर शारीरिक एवं आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। हजारों लोगों ने गुरुदीक्षा प्राप्त करके शिष्यत्व ग्रहण किया। साथ ही पूर्णतया नशामुक्त एवं मांसाहारमुक्त जीवन जीने का भी संकल्प लिया। इस यज्ञ में सभी जाति-धर्म-सम्प्रदाय के लोगों की समभाव से उपस्थिति रही। इसी के साथ ही आपके द्वारा शेष 100 महाशक्तियज्ञों को एक स्थान पर सम्पन्न करने का भी निर्णय लिया गया। अब यह शेष सभी महाशक्तियज्ञ पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम में ही सम्पन्न होने हैं।
इन महाशक्तियज्ञों को, योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज स्वतः सम्पन्न करते हैं। उनके द्वारा खुद एक आसन पर बैठकर नित्य छः घंटे हवन किया जाता है। यह एक यज्ञ ग्यारह दिन तक चलता है। हवन सामग्री ग्यारह दिन में मात्र 32 किलो के अन्दर ही उपयोग की जाती है।
यज्ञस्थल पर माता भगवती जगत् जननी जगदम्बा की मूर्ति बनवाकर स्थापित की जाती है, जिसे यज्ञ की पूर्णता के बाद जल में विसर्जित कर दिया जाता है। यज्ञ स्थल पर पहुंचने वाले भक्तों को यज्ञस्थल पर बैठने व मंत्र जाप करने तथा यज्ञ स्थल की परिक्रमा करने की व्यवस्था की जाती है। इन महाशक्तियज्ञों में यज्ञस्थल की एक परिक्रमा करना ही जीवन को धन्य बनाने के बराबर रहता है, क्योंकि एक परिक्रमा का फल, मनुष्य को चारों धामों के साथ दुनिया के समस्त धर्मों के धार्मिक स्थानों की यात्रा के बराबर प्रदान करने वाला है। यज्ञ के प्रभाव का तो वर्णन कर पाना ही कठिन है। इन यज्ञों के विषय में वही जान सकता है, जिसने यज्ञस्थल का दर्शन प्राप्त किया हो।
इन्हीं महाशक्तियज्ञों में परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज द्वारा जन-जन के कल्याण के लिये समस्त दुःखों एवं कष्टों को नाश करने वाला, साधनात्मक चेतना जगाने वाला पूर्ण प्रभावक शक्तिजल तैयार किया जाता है, जो वहां पहुंचने वाले भक्तों को प्रसाद के रूप में निःशुल्क बंटवाया जाता है।
इन महाशक्तियज्ञों के विषय में तो कुछ भी लिखना सूर्य को दीपक दिखाने के बराबर है। ये यज्ञ ही योगीराज जी के युग चेतना पुरुष होने के प्रमाण हैं। और कहां मिलेंगे ऐसे यज्ञ, जहां देखने को मिलता है योगीराज जी का विराट् स्वरूप तथा उनका ऋषितुल्य जीवन और साथ ही देखने को मिलती है, समाजकल्याण के लिये उनकी तड़प, उनका समाज के प्रति अपनापन ?
इन महाशक्तियज्ञों की विशेषता की पूर्ण जानकारी समाज को तभी प्राप्त हो सकेगी, जब या तो योगीराज जी द्वारा शेष 100 महाशक्तियज्ञ सम्पन्न कर दिये जायेंगे या उनके द्वारा ही जानकारी दी जायेगी।
इन यज्ञों में ही देखने को मिलती है योगीराज जी की विराट्ता व विलक्षणता। शेष समय तो योगीराज जी अपने को सामान्य मानव ही बनाकर रखते हैं।

जय गुरुवर की !        जय माता की !