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सत्यपरीक्षण

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जनजागृति हेतु सत्यपरीक्षण आवश्यक

देश की राजधानी दिल्ली में हो

धर्मगुरुओं का सम्मेलन

परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज का आवाहन

परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज बचपन से ही माता भगवती जगत् जननी दुर्गा जी की साधना-उपासना में लीन रहे हैं। उन्होंने माता की अनेकों प्राणघाती, कठिनतम, विशिष्ट साधनाओं को सम्पन्न करके ’’माँ’’ के साक्षात् दर्शन प्राप्त किये हैं और माता के ही आदेश पर वे समाज को नशा एवं मांसाहारमुक्त बनाते हुये माँ रूपी ज्ञान की ज्योति को जन-जन में स्थापित कर रहे हैं। लेकिन, तथाकथित साधु वेशधारी, ढोंगी, लम्पट व पाखंडियों के क्रियाकलापों से पूज्य गुरुवर चिन्तित हैं, क्योंकि ऐसे लोग अपने-आपको तांत्रिक-मांत्रिक, योगाचार्य, पीठाधीश्वर जैसे अनेक नामों से विभूषित करके धर्मगुरुओं का चोला ओढ़कर अपनी लच्छेदार भाषा से भोलेभाले लोगों को दिग्भ्रमित करके अपना स्वार्थ सिद्ध करने में लीन हैं। इससे धर्म के प्रति आस्था रखने वालों का शोषण तो हो ही रहा है, धर्म के प्रति लोगों की आस्था भी घटती जा रही है। इससे मांस व मदिरा जैसे अनेकों घातक नशों के फेर में फँसकर मानवता कराह उठी है।

परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज का मानना है कि समाज को साधुवेशधारी ढोंगियों से बचाने के लिए एक ही रास्ता है और वह है ‘सत्यपरीक्षण‘, जिसमें वे स्वयं उपस्थित होकर अपना भी सत्यपरीक्षण कराने के लिए तैयार हैं। इससे देश व समाज को ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व को यह विदित हो सकेगा कि समाज को सच्ची राह दिखाने वाला धर्मगुरु कौन है?

इस संबंध में पूज्य गुरुवर श्री शक्तिप़ुत्र जी महाराज ने विश्वभर के समस्त धर्मगुरुओं का आवाहन किया है कि ‘सत्यपरीक्षण‘ के लिए देश की राजधानी दिल्ली में एक सम्मेलन का आयोजन किया जाये, जिसमें विश्व के सभी तांत्रिक-मांत्रिक, योगाचार्य व धर्मगुरु उपस्थित हों। वर्तमान समय में विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि ‘लाई डिटेक्टर‘ जैसे यंत्र के सामने जाने पर इस बात की जानकारी तुरंत हो जाती है कि कौन व्यक्ति सच बोल रहा है और कौन व्यक्ति झूठ? अतः इस आयोजन में सभी धर्मगुरुओं का ‘लाई डिटेक्टर‘ के माध्यम से सत्यपरीक्षण होना चाहिए। इससे समाज को पता चल सकेगा कि इस युग के अवतार (युगपुरुष) कौन है ? जिससे शेष सभी सन्त, योगी तथा समाज, उनके द्वारा बताये गये मार्गदर्शन पर चलकर अपना कल्याण कर सकें।

इस आयोजन में सभी तथाकथित योगाचार्यों व धर्मगुरुओं को यह बताना होगा कि उनकी कुण्डलिनीशक्ति पूर्णरूपेण जाग्रत् है, वे जब चाहें पूर्ण समाधिस्थ हो सकते हैं और अपने सूक्ष्म शरीर से कहीं भी विचरण कर सकते हैं। क्या उन्होने प्रत्यक्ष रूप से अपने इष्ट के दर्शन किये हैं, साथ ही कभी भी किसी भी क्षण अपने इष्ट के दर्शन व उनसे निर्देशन प्राप्त कर सकते हैं, जिसके बल पर वे देश, समाज व विश्व में आध्यात्मिक चेतना का संचार कर रहे हैं।

श्री शक्तिपुत्र जी महाराज अपने चिन्तन में कहते हैं कि उक्त आयोजन का उद्देश्य अपनी प्रसिद्धि पाना नहीं, बल्कि देश, समाज व विश्व के आम जनमानस को तथाकथित पाखंडियों से बचाना है, अन्यथा ये अज्ञानी व धूर्त लोग मानवता की धज्जियां बिखेरकर रख देंगे।

ज्ञातव्य है कि ऋषि परम्परा की अति महत्त्वपूर्ण कड़ी के रूप में अवतरित ब्रह्मर्षि, धर्मसम्राट्, युग चेतना पुरुष परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के विषय में पूर्व के अनेकों प्रतिष्ठित देशी-विदेशी भविष्यवक्ताओं जैसे नॉस्त्रेदामस, कीरो, डॉ. जूलबर्न, प्रो.हरार, पीटरहरकौस, महात्मा तिश्वरंजन ब्रह्मचारी, प्रो. कीर्तिधरण आदि ने अपनी-अपनी पुस्तकों में आज से 400-500 वर्ष पहले ही स्पष्ट लिख रखा है कि आपका जन्म किस देश के किस प्रान्त के किस जिले के किस गाँव व किस जाति में होगा। आपका बचपन का नाम क्या होगा एवं आपकी साधनात्मक क्षमता व आध्यात्मिक कार्यों के विषय में विस्तार से उल्लेख किया गया है। आपके शरीर एवं हाथों में पड़े योगों तथा रंगरूप आदि का भी उल्लेख किया गया है। भविष्यवक्ताओं के विचारों को अक्षरशः सत्य सिद्ध करते हुये युग चेतना पुरुष परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज की साधनात्मक क्षमता का सामना करने की सामर्थ्य वर्तमान में इस भूतल पर किसी भी साधु-सन्त, संन्यासी, योगी या ऋषि में नहीं है। आपने समाज के बीच अपने साधनात्मक तपबल के माध्यम से हजारों असंभव कार्यों को संभव कर दिखाया है। इससे सैकड़ों साधु-सन्त, संन्यासी, योगी आपकी साधनात्मक क्षमता का एहसास करके आपके चरणों में नतमस्तक हुये हैं।

उत्तर प्रदेश के जनपद फतेहपुर में ग्राम-भदवा के एक ब्राह्मण कृषक परिवार में जन्म लेकर बचपन से ही अपने साधनात्मक पक्ष का मन, वचन, कर्म के साथ कठोरता से पालन करने वाले युग चेतना पुरुष श्री शक्तिपुत्र जी महाराज आज करोड़ों लोगों की आस्था, श्रद्धा एवं विश्वास के केन्द्र बिंदु हैं। आपने अपने साधनात्मक जीवन में 108 महाशक्तियज्ञों की श्रृंखला के प्रारम्भिक 8 यज्ञों को देश के विभिन्न क्षेत्रों में तथा विभिन्न ऋतुओं में सम्पन्न किया। इन सभी यज्ञों में वर्षा हुई। इससे आपकी भविष्यवाणी सत्य प्रमाणित हुई और आपकी साधनात्मक क्षमता के प्रमाण समाज को स्पष्ट रूप से देखने को मिले हैं। शेष 100 महाशक्तियज्ञों को एक ही स्थान पर पूर्ण करने के लिए पूज्य सद्गगुरुदेव जी दिनांक 23 जनवरी सन् 1997 को मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की ब्यौहारी तहसील में पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम (ट्रस्ट) की स्थापना कर चुके हैं। आने वाले समय में यह विश्व की धर्मधुरी बनेगा और एक शक्तिपीठ के रूप में स्थापित होगा। आप इस स्थल को प्रतिदिन अपनी साधनात्मक क्रियाओं के द्वारा माता भगवती की ऊर्जा से पूर्ण चैतन्य करते हुये, समाज में शक्ति चेतना जनजागरण के प्रवाह को जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। यहीं पर दिनांक 15 अप्रैल सन् 1997 से अनवरत अनन्तकाल के लिए अखण्ड श्री दुर्गा चालीसा का पाठ अहर्निश चल रहा है, जो विश्व में एक विलक्षण अनुष्ठान है। इसकी चेतना तरंगों के माध्यम से करोड़ों लोग लाभ ले रहे हैं और इसको अपने जीवन में जोड़कर एक साधक की भांति समाज में सत्यधर्म की ध्वजा को स्थापित कर रहे हैं।

पूज्य सद्गगुरुदेव जी महाराज द्वारा जन-जन के कल्याण के लिए विश्वस्तरीय भगवती मानव कल्याण संगठन का गठन किया गया है। इसके लाखों कार्यकर्ता वृहद् स्तर पर समाज की मूल संस्कृति की रक्षा करते हुये समाज में छाये असुरत्व, सामाजिक बुराइयों, छुआछूत तथा जातिभेद को दूर कर रहे हैं और मानव धर्म की रक्षा करते हुये पूर्ण नशामुक्त एवं मांसाहारमुक्त समाज के निर्माण कार्य में सतत सक्रिय हैं।

दहेजप्रथा, बलिप्रथा एवं गौहत्या का कड़ा विरोध करते हुये इस संगठन ने समाज में धर्म एवं राजनीति के भ्रष्ट एवं अवांछनीय विदूषकों के विरुद्ध धर्मयुद्ध छेड़कर शोषण की शिकार निरीह जनता के हितार्थ अपने लाखों सत्यधर्म के ध्वजावाहकों के माध्यम से अपने कर्त्तव्यों की पूर्ति हेतु कटिबद्ध होते हुये दृढ़ संकल्पित हैं। सतही विचारधारा से हटकर अपने उद्देश्यों के प्रति पूर्ण सचेत रहते हुये भगवती मानव कल्याण संगठन का एक ही उदाहरण समाज की आंखे  खोलने के लिए पर्याप्त है कि आज तक संगठन के प्रयासों से पूज्य सद्गुरुदेव जी महाराज के आशीर्वाद स्वरूप 1 करोड़ से भी अधिक लोग पूर्ण नशामुक्त एवं मांसाहारमुक्त तथा चरित्रवान जीवन जीने का दृढ़ संकल्प ले चुके हैं और समाज को भी यही प्रेरणा सतत प्रदान कर रहे हैं। लगभग 15 वर्षों की अनवरत या़त्रा में संगठन द्वारा एक अभूतपूर्व कार्य युग परिवर्तन की दिशा में किया गया है। यही विशिष्ट क्रम अनीति, अन्याय, अधर्म एवं भ्रष्टाचार के माध्यम से स्थापित हुई शक्तियों को समूल नष्ट करके उखाड़ फेंकेगा और सत्यधर्म की अन्तहीन यात्रा को सुनिश्चित करेगा तथा समस्त विश्व सोने की चिड़िया नहीं, अपितु ‘चेतनावानों का राहजंस’ बनेगा।

जय गुरुवर की,        जय माता की !